September 2020

लक्ष्मीकान्त मुकुल की रचनाएँ

पांव भर बैठने की जमीन यहां अब नहीं हो रही हैं सेंध्मारियां बगुले लौट रहे हैं देर रात अपने घोसले…

2 months ago

लक्ष्मीकान्त मुकुल की रचनाएँ

छनो भर खातिर उनुका लगे ना रहे कौनो टाट के मड़ई आ फूंस-मूंजन के खोंता ऊ चिरई ना रहन भा…

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लक्ष्मी नारायण सुधाकर

जहाँ तक सवाल है जहाँ तक सवाल है शोषितों के हाल का फँसे हुए सदियों से शोषकों के जाल में…

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लक्ष्मी खन्ना सुमन की रचनाएँ

मोर  घटा देख मस्ताना मोर खुश होता दीवाना मोर राजा-सा सिर मुकुट सजा लगता बहुत सुहाना मोर सिर पर कृष्ण…

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शुचि ‘भवि’की रचनाएँ

ये सफ़र ज़ीस्त का आसान बनाने वाला ये सफ़र ज़ीस्त का आसान बनाने वालाकौन मिलता है यहाँ रिश्ते निभाने वालाहै…

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शुजाअ खावर की रचनाएँ

और क्या इस शहर में धंधा करें ख़्वाब इतने हैं यही बेचा करें और क्या इस शहर में धंधा करें…

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शीलेन्द्र कुमार सिंह चौहान की रचनाएँ

वन्दना वन्दना माँ! मुझे तुम लोक मंगल साधना का दान दो, शब्द को संबल बनाकर नील नभ सा मान दो।…

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शीला पाण्डेय की रचनाएँ

अर्थ खोते जा रहे हैं शब्द खोखे डुगडुगी हैं अर्थ खोते जा रहे हैं शौर्य की पनडुब्बियों को शेर खेते…

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शीला तिवारी की रचनाएँ

गंगा की पुकार  एक सुर में राग ये छिड़ने दे मुझको मलिन मत होने दे बहने दे, बहने दे मुझे…

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शीला गुजराल की रचनाएँ

मेरे खिलौने  मेरे खिलौने हैं अनमोल, कोई लंबे, कोई हैं गोल। कुत्ता, बंदर भालू, शेर, मिट्टी के ये पीले बेर।…

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