अहमद फ़राज़

अहमद फ़राज़ की रचनाएँ

अच्छा था अगर ज़ख्म न भरते कोई दिन और अच्छा था अगर ज़ख्म न भरते कोई दिन और उस कू-ए-मलामत…

2 months ago