आशुतोष सिंह ‘साक्षी’

आशुतोष सिंह ‘साक्षी’ की रचनाएँ

काश! मैं कुत्ता होती जाड़े में सिमटी हुई, ठंड से ठिठुरती हुई, चिथड़ों में लिपटी हुई, नंगे पाँव फर्श पर…

2 months ago