उर्मिला माधव

उर्मिला माधव की रचनाएँ

वो जो रह-रहके चोट कर जाए वो जो रह-रहके चोट कर जाए, अपने अलफ़ाज़ से मुकर जाए, आशिक़ी,इश्क एक फजीहत…

2 months ago