त्रिलोकचन्‍द महरूम

त्रिलोकचन्‍द महरूम की रचनाएँ

जय हिन्‍द पैदा उफ़क़े –हिन्‍द से हैं सुबह के आसार है मंज़िले-आखिर में ग़ुलामी की शबे-तार आमद सहरे-नौ की मुबारक…

3 months ago