महाराज सिंह परिहार

महाराज सिंह परिहार की रचनाएँ

अधूरी आज़ादी... आज़ादी है अभी अधूरी पाए न जनता रोटी पूरी तंत्र लोक से दूर हुआ है अवमूल्यन भरपूर हुआ…

7 months ago