रामेश्वरप्रसाद गुरु ‘कुमारहृदय’

रामेश्वरप्रसाद गुरु ‘कुमारहृदय’ की रचनाएँ

गुलाब काँटों में है खिला गुलाब! आसपास पैनी नोकें हैं छेद रही हैं उसका तन, किंतु पंखुड़ियों पर हँसता है…

2 weeks ago