विनोद तिवारी

विनोद तिवारी की रचनाएँ

टूटती है सदी की ख़ामोशी टूटती है सदी की ख़ामोशी फिर कोई इंक़लाब आएगा मालियो! तुम लहू से सींचो तो…

1 month ago