विशाखा विधु

विशाखा विधु की रचनाएँ

तेरी बस्ती का मंज़र देखती हूँ  तेरी बस्ती का मंजर देखती हूँ तबाही आज घर-घर देखती हूँ। बज़ाहिर मोम का…

2 months ago