शाह दीन हुमायूँ

शाह दीन हुमायूँ की रचनाएँ

क्यूँ मुश्त-ए-ख़ाक पर कोई दिल दाग़दार हो  क्यूँ मुश्त-ए-ख़ाक पर कोई दिल दाग़दार हो मर कर भी ये हवस कि…

2 months ago