संतोष श्रीवास्तव

संतोष श्रीवास्तव की रचनाएँ

बचा लेता है  कागज वज़नदार होता है जब नोट बन जाता है रौंद डालता है सारे आदर्श, मानवीयता, रिश्ते निगल…

2 months ago