संध्या पेडणेकर

संध्या पेडणेकर की रचनाएँ

रिश्ते स्नेह नहीं शुष्क काम है लपलप वासना है क्षणभंगुर क्षण के बाद रीतनेवाली मतलब से जीतनेवाली रिश्तेदारी है खाली…

2 months ago