सत्यपाल सहगल

सत्यपाल सहगल की रचनाएँ

दिनांक आज इतनी हलचलें हैं कि सिर्फ हलचलें हैं उदासी का चेहरा सिर्फ खुद हो नज़र आता है सभी कोनों…

2 months ago