सत्यानन्द निरुपम

सत्यानन्द निरुपम की रचनाएँ

कुहूकिनी रे!  कुहूकिनी रे, बौराए देती है तेरी आवाज़. कहीं सेमल का फूल कोई चटखा है लाल तेरी हथेली का…

2 months ago