सरवत ज़ोहरा

सरवत ज़ोहरा की रचनाएँ

बे-तहाशा उसे सोचा जाए बे-तहाशा उसे सोचा जाए ज़ख़्म को और कुरेदा जाए जाने वाले को चले जाना है फिर…

1 month ago