सलाम मछलीशहरी

सलाम मछलीशहरी की रचनाएँ

रद्द-ए-अमल इक हक़ीक़त इक तख़य्युल नक़रई सी एक कश्ती दो मुनव्व क़ुमकमे इन पे मग़रूर थी इस ज़मीं की हूर…

2 months ago