सलीम कौसर

सलीम कौसर की रचनाएँ

मैं ख़्याल हूँ किसी और का  मैं ख़्याल हूँ किसी और का, मुझे सोचता कोई और है, सरे-आईना[1]मेरा अक्स है,…

2 months ago