सलीम फ़िगार

सलीम फ़िगार की रचनाएँ

कहीं आँखें कहीं बाज़ू कहीं से सर निकल आए  कहीं आँखें कहीं बाज़ू कहीं से सर निकल आए अंधेरा फैलते…

2 months ago