‘सहर’ इश्क़ाबादी

‘सहर’ इश्क़ाबादी की रचनाएँ

दावर ने बंदे बंदों ने दावर बना दिया  दावर ने बंदे बंदों ने दावर बना दिया सागर ने क़तरे क़तरों…

2 months ago