साग़र सिद्दीक़ी

साग़र सिद्दीक़ी की रचनाएँ

अज़्मत-ए-ज़िन्दगी को बेच दिया अज़्मत-ए-ज़िन्दगी को बेच दिया हम ने अपनी ख़ुशी को बेच दिया चश्म-ए-साक़ी के इक इशारे पे…

2 months ago