सीमा संगसार

सीमा संगसार की रचनाएँ

अछूत तुम फेंक देते हो वह थाली जिसमें मैं झाँकती हूँ अपने अक्स को मेरी परछाइयाँ भी तुम्हें उद्विग्न कर…

1 month ago