सुधा चौहान

सुधा चौहान ’की रचनाएँ

ऊँट  रोज़ सवेरे कितने ऊँट, पीठ लाद ढेरांे तरबूज़। धीरे-धीरे कहाँ चले, जब पहुँचेंगे पेड़ तले- गर्दन ऊँची कर खाएँगे,…

1 month ago