सुभाष काक

सुभाष काक की रचनाएँ

दर्पण दर्पण में कई पशु अपने को पहचानते नहीं। मानव पहचानते तो हैं पर प्रत्येक असन्तुष्ट है अपने रूप से।…

1 month ago