हरकीरत हीर

हरकीरत हीर की रचनाएँ

ग़ज़लें चलो ज़िन्दगी को मुहब्बत बना दें चलो ज़िन्दगी को मुहब्बत बना देंजहां से ज़ुलम औ' सितम हम मिटा दें…

3 months ago