अजय जनमेजय की रचनाएँ

रेल चली छुक-छुक

रेल चली छुक-छुक,
रेल चली छुक-छुक!

रेल में थे नाना,
साथ लिए खाना।
खाना खाया चुप-चुप,
रेल चली छुक-छुक!

रेल में थी दादी,
बिल्कुल सीधी-सादी।
देख रही टुक-टुक,
रेल चली छुक-छुक!

रेल में थी मुनिया,
देखने को दुनिया।
दिल करे धुक-धुक,
रेल चली छुक-छुक!

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