अभिरंजन कुमार की रचनाएँ

छोटी चिड़िया, बड़ी चिड़िया

छोटी चिड़िया पेड़ पर,
बैठी बड़ी मुंडेर पर!

छोटी चिड़िया ने फल खाए
और बड़ी ने दाने,
फिर दोनों ने, चीं-चीं, चीं-चीं
खूब सुनाए गाने।

गाने से जब पच गया खाना
खाया फिर से सेर भर!

छोटी ने फिर दाना खाया
और बड़ी ने फल,
इसके बाद पिया दोनों ने
नदी किनारे जल।
फिर दुलार से चोंच मिलाई
आजू-बाजू घेर कर।

अब गाने, गा-गाकर दोनों
आईं सबसे कहने,
अचरज क्यों करते हो भाई
आखिर हम दो बहनें।
जब जी चाहे हम तो प्यारे
प्यार करेंगे ढेर भर।

-साभार: हिन्दुस्तान दिल्ली, रवि उत्सव, 3.7.2005

तितली रानी आना री 

आना री आना, ओ तितली रानी आना री!
मेरे साथ खेलना, करना नहीं बहाना री!

फूलों के कानों में गुप-चुप क्या बतियाती हो,
इधर-उधर की उससे बातें कहने जाती हो,
चुगली अच्छी नहीं, पड़ेगा क्या समझाना री?

इतने सारे रंग कहाँ से पाए हैं तूने,
अपने प्यारे पंख जरा देना मुझको छूने,
नहीं सताऊँगी बिल्कुल भी, मत डर जाना री!
भाते सब तुमको गुलाब या जूही और चमेली,
इन सबसे क्या कम कोमल है मेरी नरम हथेली,
बोलो, कितना तुम्हें पड़ेगा शहद चटाना री!

इतनी बार बुलातीं, फिर भी बड़ा अकड़ती हो,
करूँ खुशामद जितनी, उतना नखरे करती हो,
मत आओ, पर समझो ठीक नहीं इतराना री!
बिस्तर तेरा पंखुड़ियों का, मेरा माँ का आँचल,
तुम पराग खाती, मैं खाता दूध-मिठाई-फल,
भौरे तुम्हें सुनाते, मुझको दादी गाना री।

अकड़ रही हो इसीलिए न, पंख तुम्हारे पास,
जब चाहो फूलों पर बैठो या छू लो आकाश,
तुम्हें न पड़ता टीचर जी के डंडे खाना री!

-साभार: हिन्दुस्तान दिल्ली, रवि उत्सव, 3.7.2005

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