किशोरकुमार कौशल की रचनाएँ

चंदा मामा, घर आ जाओ 

चंदा मामा, चंदा मामा,
मेरे घर आ जाओ मामा!
चंदा मामा, चंदा मामा
कहाँ तुम्हारा नया पजामा?
ऊपर से मुसकाते रहते,
धीरे-धीरे गाते रहते।
क्या गाते हो मन ही मन में
आकर हमें सुनाओ, मामा।
रोज-रोज क्यों बहकाते हो,
मेरे पास नहीं आते हो,
दुबले-पतले, मुँह लटकाते,
फिर कैसे मोटे हो जाते?
सच क्या है, कैसे सब होता?
आकर हमें बताओ, मामा।
इतने वेश बदलते हो तुम,
दिन में नहीं निकलते हो तुम,
मम्मी-पापा तुम्हें बुलाते,
अच्छा हलवा-खीर बनाते
आकर तुम खा जाओ, मामा,
मेरे घर आ जाओ मामा!

क्या करते भगवान जी

पापा जरा बताना मुझको,
क्या करते भगवान जी?

दूध कहाँ से लाते हैं वे,
क्या पाली है भैंस जी?
रोटी कहाँ पकाते हैं वे,
क्या ले ली है गैस जी?
कहाँ सिलैंडर भरवाते हैं
कहाँ उगाते धान जी?

क्या उनके घर में भी बच्चे,
करते रहते शोर जी?
क्या उनकी बातें सुनकर वे,
हो जाते हैं बोर जी?
दफ्तर में जाते हैं वे,
या खोली कहीं दुकान जी?

क्या ऊपर भी धुआँ-धुआँ है,
चलती है बस कार जी,
लाउड स्पीकर शाम सवेरे
बजते हैं बेकार जी?
कहीं किराए पर रहते,
या अपना बना मकान जी?

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