कीरति कुमारी की रचनाएँ

वादा करके मेरे श्याम दग़ा दी तूने 

वादा करके मेरे श्याम दग़ा दी तूने।
गै़रों के रहके सारी रात गमा दी तूने॥
शाम से रात तपौअर में गुज़ारी मैंने।
क्या बिगाड़ा था मेरी जान सज़ दी तूने॥
जान जाती है मेरी तुझको मज़ा आता है।
वादा करके भी मुहब्बत को घटा दी तूने॥
तुम मिलो या न मिलो मैं तुम्हें भूलूँगी नहीं।
मिल गये गर तो जी ‘कीरति’ को बना दी तूने॥
रातभर वस्ल में मिल करके मज़ा दी तूने।
लगी थी आग मेरे दिल में बुझा दी तूने॥
मिल गये नन्दलाल क्या करूँ उनकी मैं अदब।
लेके उल्फ़त का मज़ा खूब चला दी तूने॥
रात की बात सखी क्या कहूँ कु कह न सकूँ।
मिल गये श्याम मुझे रात जिला ली तूने॥
हो गये कीर्ति-पिया अब न किनारा करना।
अब तो मिलना पड़ेगा बान लगा दी तूने॥

अब तो मोहन से भी लागी लगन 

अब तो मोहन से भी लागी लगन,
हम प्रिय प्यारे की छबि में मगन॥
अंग-अंग युगल शोभा सँवार,
लखि दोउन लानत कोटि मदन॥
मुसकात दोऊ जब मन्द-मन्द,
दामिनि सो दमकत दोउ रदन।
‘कीरति’ उन निवसतु युगल प्रिये,
रहे ध्यान सदा तब युगन युगन॥

लीला के करैया नेकु माखन चोरैया 

लीला के करैया नेकु माखन चोरैया,
दधि दूध के लुटैया रास-मंडल रचैया हैं।
गिरि के धरैया ब्रज द्वड़त बचैया,
गर्व इंद्र के हरैया वस्त्र गोपिन चोरैया हैं॥
वृषासुर दुष्ट बन बक के बधैया,
प्राण दासन रखेया घट-घट के रमैया हैं।
सोई दीनानाथ आज ‘कीरति कुमारी’ गृह,
जनम लेवैया दुख दारुण हरैया हैं॥

कालीदह कूदि काली नाग के नथैया 

कालीदह कूदि काली नाग के नथैया,
लादि कमल पठैया नन्द-संकट हरैया हैं।
मथ्ुारा जवैया वस्त्र रजक लुटैया,
जोई कूबरी हरैया पोड़ कबल हनैया हैं॥
दुखदाई कंस को। विध्वंस कै सुईस जोई,
निज दीन दासन क दुख के हरैया हैं।
सोई दीनानाथ आज ‘कीरिति कुमारी’ गृह,
जनम लेवैया दुख दारुण हरैया हैं॥

हमारे श्ययामसुन्दर को इशारा क्यों नहीं होता

हमारे श्ययामसुन्दर को इशारा क्यों नहीं होता।
पड़ा है दिल तड़पता है सहारा क्यों नहीं होता॥
हुई मुद्दत से दिवानी न तूने ख़बर ली मेरी।
मरीजे़-इश्क में मरना हमारा क्यों नहीं होता॥
न कल दिनरात है मुझको जुदाई में तेरे प्यारे।
लबों पर जान आई है सहारा क्यों नहीं होता॥
न दुनियाँ मुझको भाती है न मैं भाती हूँ दुनियाँ को।
मगर ‘कीरति’ का दुनिया से किनारा क्यों नहीं होता॥

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