ख़ुर्शीद अकरम की रचनाएँ

अक़्ल बड़ी बे-रहम थी

दिल को उस के दुख की घड़ी में
तन्हा छोड़ दिया
जिस्म ने लेकिन साथ दिया
दुख के गहरे सागर में
दिल को छाती से लिपटाए
जिस्म की कश्ती
होल रही है डोल रही है
अक़्ल किनारे पर बैठी
मीठा मीठा बोल रही है
दुनिया के हँगामों में
उल्टी जस्त लगाने को
बाज़ू अपने तौल रही है

इक नई दुनिया का सबब

इस से पहले की हम
एक ग़मनाक कहानी के किरदार हो जाएँ
आओ अपने हिस्से की धूप ले कर
हवा हो जाएँ
किसी और सय्यारे में जा बसें
आदम और हव्वा हो जाएँ
फिर ख़ता करें ख़ुदाई से घबरा कर
और इस जुर्म-ए-मोहब्बत की सज़ा पाएँ
इक नई दुनिया का सबब हो जाएँ

एक आख़िरी बोसा 

रिश्तों की बुकारत बचाने में
मोहब्बत काम आ गई तो क्या
मलूल न हो
मोहब्बत और दुनिया के दरमियान
ये रिश्ता काँच और पत्थर का
यूँ ही बना रहेगा
आईन तो यही ठहरा है कि
फ़त्ह का परचम दुनिया ही लहराएगी
और मोहब्बत
ज़मीन की तह में छुप कर इंतिज़ार करेगी
दुनिया के फ़ासिल बन जाने का
तू पशीमान न हो
अपने पैमाँ को मानिंद-ए-हबाब टूटता देख कर

आओ मोहब्बत के ख़ुदा का शुक्रिया अदा करें
और एक आख़िरी बोसे को महफ़ूज़ कर के
अपने अपने केचुओं की भीड़ में खो जाएँ
यूँ कि धूँड़ें तो
अपना भी पता न पाएँ

तुम्हारे लिए 

ज़मीन की कशिश से बाहर एक आसमान
एक घोड़े की पीठ
और एक सड़क जिस पर
धूप चमकीली
बारिश अलबेली होती है
एक मिसरा लिखा था तुम्हारे लिए
मन की मिट्टी में दबा कर रखी थी
तुम्हारे नाम की कोंपल
तुम्हारे लिए बचाई थी
लहू की लाली
रतजगे
अक़ीदों की शिकस्तगी
आग की लपटें एक हाथ में
एक में आब-ए-पाक
एक आँख शर्मीली
एक आँख बेबाक
कश्ती के तख़्ते
और शौक़ का मव्वाज दरिया
शहद दुनिया को बाँट दिया
बचा कर रखा अपना मोम
तुम उस की बाती होतीं
हम जलते सारी रात

तुम ने चुना
सोने का सिंदूर
चाँदी की चँगीरी
पलंग नक़्शीन
पुख़्ता छत
पक्का घड़ा
उथला कुवाँ

पानी जैसा ठहर गईं तुम
हवा के जैसा बिखर गया मैं

बार एक कतरा आँसू का

एक सच्ची कहानी
जब धकेल दी जाती है
किसी फ़िल्मी क्लाइमेक्स की तरफ़
अपना मुँह छुपा लेता है सूरज
फीके चाँद की ओट में
एक दूसरे के गिर्द घूमते कबूतर
मग़्मूम हो कर बैठ जाते हैं
परों में मुँह दे कर
और धरती तय्यारी करती है
बार उठाने की
एक क़तरा आँसू का

ये मेरे ख़्वाब नहीं

उदासी की झिलमिल झील के पार
मैं ने देखा
तुम्हारी लाल चूड़ियाँ सब्ज़ हँसी हँस रही थीं
ओस की एक क़ुर्मुज़ी बूँद
तुम्हारी पेशानी पर दमक रही थी
ख़ुश-ख़्वाबी के नाख़ुनों से तुम
अंदेशों की गिरहें खोल रही थीं
चाँद की नमी से
इम्कान के बे-कनार पन्ने पर
कुछ लिख रही थीं तुम्हारी उँगलियाँ
और तुम्हारें पाँव के नीचे
धरती की झाँझन बज रही थी

और ये मेरा वहम नहीं
कि पृथ्वी पर कहीं जब चाँद
एक बच्चे के साथ दौड़ रहा था
तुम हवा से अपना हाथ छुड़ा कर
एक सजी हुई चौखट में दाख़िल
हो गई थीं

और ये मेरा ख़्वाब नहीं
कि सूरज जब
आधे आसमान में चमक रहा था
अपनी चूड़ियाँ अपनी बंुदी
अपने अंदेशे अपनी उँगलियाँ
अपने हाथ और अपने होंट
सब उतार कर
तुम ने
आँख से आँख जलाई थी
जलती बत्ती बुझाई थी

वीराने रास्ते की पैमाइश 

वीराने से काशाने तक
बस एक क़दम की दूरी है

एक क़दम हो सकता है एक साअत का
एक हैवानी उम्र का
या एक नूरी साल का

वीरान रास्ते की पैमाइश के लिए
ख़ुदा ने
फ़रिश्ता मुक़र्रर नहीं किया

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