Poetry

चंद्रमोहन ‘दिनेश’की रचनाएँ

बिल्ली रानी

बिल्ली रानी बहुत भली
पहन-ओढ़ कर कहाँ चली?
क्या चूहों की शामत है?
नहीं, खीर की दावत है!

जिसकी लाठी उसकी भैंस

चूजा टूँग रहा था दाना
पीकर पानी ठंडा,
तभी पास में पड़ा दिख गया
छोटा-सा एक डंडा।
डंडा लेकर ऐंठ अकड़कर
पहुँचा भैंसे पास,
बोला, ‘भैंस मुझे दे जल्दी-
डंडा मेरे पास।’

चल मेरे घोड़े

चल मेरे घोड़े तिक-तिक-तिक,
बातें थोड़ी काम अधिक।
जाना है बंबई मुझे,
झटपट मुझको पहुँचा दे।
अगर हो गई देर मुझे,
नहीं मिलेगी चाय तुझे।

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