जंगवीर सिंह ‘राकेश’की रचनाएँ

‘. . . जीत जाओगे एक दिन !!’

अगर तुम बारीकियों को पकड़ रहे हो
तो सीख जाओगे एक दिन !!
हौसले से मंजिल पर बढ़ रहे हो
तो जीत जाओगे एक दिन !!

समय की हवा उस रूख में बहने लगेगी
जिस दिशा में तुम होगे !
खुशियों की परछाईयाँ पीछे चलने लगेगीं
जिस जगह पे तुम होगे !
साफ नीयत से काम करोगे
तो काम भी तुम पर मरेंगे !!

अगर ज़मी-आसमां एक कर रहे हो
तो जीत जाओगे एक दिन !!

ख़ामोशी के संग भी तुम
ख़ामोश मत रहना !!
हुस्न के नशे में हर दम
मदहोश मत रहना !!
अपनों को गैर मत करना
गैरों से बैर मत करना !!!!

अपनी मुश्किलों से जो लड़ रहे हो
तो जीत जाओगे एक दिन !!

हुस्न इक निकासी है
आत्मज्ञान सर्वव्यापी है
ये बात जो समझ रहे हो
तो जीत जाओगे एक दिन !!

 .कोई खो गया है’

हृदय-नगरी में बड़ा शोर मचा है
शायद ! कोई अन्दर खो गया है

कुछ झूमती हुई , बदहवासियाँ,
शोर मचाती चिल्लाती खामोशियाँ
मन के, नीले गगन में उड़ती रहीं
कुछ जवान-चंचल चिड़ियों की तरह!

मैंने दिल से पूछा, दिल रो पड़ा है
शायद ! कोई अन्दर खो गया है!

दु:खों में क्या पत्थर भी रोते हैं कोई
अक्स चूमते – धरा भिगोते हैं कोई?
जब सारा जग सोता है हम जागते हैं
या फिर अपना बुत ख़ुदी तराशते हैं !

मेरे हृदय में पूरा संसार बसा है
और ज़िस्म पत्थर का हो गया है
शायद ! कोई अन्दर खो गया है!

‘भूख’

जिनके पेट भरे होते हैं,
मस्त आलम में वो जीते हैं
जो बचपन बेचकर कमाते हैं, न
बच्चे वही भूखे होते हैं ।
जो किस्मत के मारे होते हैं
कमजोर नहीं होते, बेचारे होते हैं।

निकल आते हैं सड़कों पर
बाजारों में, कभी चौराहों पर
पेट के वास्ते दर-दर भटकते हैं
एक-एक निवाले की जो कीमत समझते हैं
भूख के बदले में, भूख खाकर,
सोते नहीं, पर सोते हैं,
बच्चे जो भूखे होते हैं ।

किसान की मजबूरी है परिवार पालना
झूठा वरना लगता है अधिकार पालना
धूल, कंकड़, मिट्टी, रोटी सब है मिट्टी
मिलती नही है सही कीमत फिरभी फसल की
तभी तो बेचारे, फाँसी लगाकर,
फंदों में झूले होते हैं, और,
नेता, सरकारें रोज, मौज में,
नींद चैन की खूब सोते हैं
साहब! इनके पेट भरे होते हैं,
हाँ! इनके पेट भरे होते हैं ।

कोई उम्रभर इत्र की खुशबू में जीता है
कोई उम्रभर गरीबी की बदबू में जीता है
अमीर लोग जमीं पर नही होते,
कारों, बंगलों, हवाई जहाजों में होते हैं
और गरीब सिर्फ जमीं पर होता है
यहीं घिसता है, यहीं पर मरता है
जिंदगी भर जो गम ढोते हैं
जिंदगी नहीं जीते, रोते हैं
प्यार-व्यार वही करते हैं,
जिनके पेट भरे होते हैं

जो सपनों में खोये होते हैं,
लोग वही भूखे होते हैं ।

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