जनार्दन राय की रचनाएँ

जीरादेई में चमके सितारा

जीरादेई में चमके सितारा
बनके राजेन्द्र भारत दुलारा।
जीरादेई में चमके सितारा॥

दीनता, दासता-पाश में थी,
छटपटाती रही भारत माता।
तोड़ने नाग-पाश को आया,
भारत माता का बेटा पियारा।
जीरादेई में चमका सितारा॥

जब गुलामी का तम छा रहा था,
देश के कोने-कोने में जमकर।
लाके स्वाधीनता का उजाला,
दूर फेका वतन का अन्धेरा।
जीरादेई में चमका सितारा॥

जिन्दगी सादगी की बिताकर,
ऊँचे भावों को सब दिन संजोया।
सेवा-भाव से जीवन सजाकर
बना दीनों का अनुपम सहारा।
जीरादेई में चमका सितारा॥

उसकी बौद्धिक प्रखरता परख कर,
पूज्य बापू ने सहयोग पाया।
खूब निकला गुणाकर मेधावी,
देश को दे विधान जग से न्यारा।
जीरादेई में चमका सितारा॥

देश-वासी आभारी सदा था,
शील, गुण, रूप, करुणा निरखकर।
किया सम्मान उसका निराला,
राष्ट्रपति बनाके दुबारा।
जीरादेई में चमका सितारा॥

-समर्था
29.5.1984 ई.

स्वागत है पन्द्रह अगस्त

स्वागत है पन्द्रह अगस्त,
उल्लास हर्ष ले आया है।
जीवन का राष्ट्रीय पर्व
वर्षान्तर में ले आया है।

पीढ़ी, दर पीढ़ी से हमसे
स्वतन्त्रता जब रूठी थी।
और विदेशी शासन को
माया जब बड़ी अनूठी थी।
बाँह थाम उस स्वतंत्रता को
द्वार हमारे लाया है।
स्वागत है पन्द्रह अगस्त,
उल्लास, हर्ष ले आया है।

शत-शत आँखों के सपने को
तुमने ही साकार किया।
दुध-मुँहों की आँखों को
आजादी का दीदार किया।
असहयोग का अन्त किया,
निर्माण-लक्ष्य ले आया है।
स्वागत है पन्द्रह अगस्त
उल्लास हर्ष ले आया है।

गौरव-मन्दिर शून्य पड़ा था,
दीप नहीं जल पाते थे।
गुंज न पाती घंटी थी
औ शंख नहीं बज पाते थे।
प्राण-प्रतिष्ठा कर उसमें
सदभाव मंच ले आया है।
स्वागत है पन्द्रह अगस्त,
उल्लास हर्ष ले आया है।

बल पाकर तुमसे हमने
शोषित को है आश्वस्त किया।
अन्त बुराई का कर
अच्छाई को है स्थान दिया।
भेद-भाव को दूर हटाने
प्रेम-राग ले आया है।
स्वागत है पन्द्रह अगस्त,
उल्लास हर्ष ले आया है।

राष्ट्र-पर्व आया जाँचे-
परखें हम अपने कर्मों को।
लेखा-जोखा ले-लेकर
समझें हम अपने धर्मों को।
नवोत्साह से हिय भरने,
संगीत नया ले आया है।
स्वागत है पन्द्रह अगस्त,
उल्लास हर्ष ले आया है।

आओ लें संकल्प सभी,
निज देश सम्मुन्नत करने का।
प्राणों की बलि देकर भी
भारत की रक्षा करने का।
उत्प्रेरित करने सब को
अभिप्रेरक स्वर ले आया है।
स्वागत है पन्द्रह अगस्त,
उल्लास हर्ष ले आया है।

-देसुआ,
29.7.1975

मेरा देश है प्राण-पियारा

मेरा देश है प्राण-पियारा,
इसके झंडे को झुकने न देंगे,
मेरा देश है प्राण-पियारा।

जिसके चरणों को धोता है सागर,
कर रही गंगा-यमुना उजागर।
उसकी कीर्ति को मिटने न देंगे,
इसके झंडे को झुकने न देंगे।
मेरा देश है प्राण-पियारा।

जो आजादी का दीप लेकर,
जिन्दा प्रताप था खुशियाँ देकर।
उसकी ज्योति को बुझने न देंगे,
इसके झंडे को झुकने न देंगे।
मेरा देश है प्राण-पियारा।

सीख लेंगे हम त्याग अपने राम से,
प्रीत पायेंगे प्यारे घनश्याम से।
लोक रीति को मिटने न देंगे,
इसके झंडे को झुकने न देंगे।
मेरा देश है प्राण-पियारा।

जिस तथागत ने घूम-घूम गाँव में,
दिया सन्देश देश औ विदेश में।
उसकी शिक्षा भूलाने न देंगे,
इसके झंडे को झुकने न देंगे।
मेरा देश है प्राण-पियारा।

गाँधी, राजेन्द्र, वीर जवाहर ने,
जिस पथ को दिखाया सुवास में।
उसी राह पे चलते रहेंगे,
इसके झंडे को झुकने न देंगे।
मेरा देश है प्राण-पियारा।

जय भारत

जय, जय भारत, तेरी जय, जय,
जय, जय भारत माँ हे।

सुत तेरे हम हैं सभी खड़े,
सब तेरा मंगल चाह रहे,
तेरे चरणों पर शीष चढ़ाने,
तेरा आशीष माँग रहे।
जय, जय, भारत माँ हे॥

हम देश-भक्ति के भूखे हैं,
कल्याण देश का चाह रहे।
जीवन की बलि दे-दे कर
हम तेरा गौरव माँग रहे।
जय, जय, भारत माँ हे॥

जो वीर काम तेरे आये,
हम ज्योति उसी से माँग रहे।
सरदार भगत, राणा प्रताप के
पथ पर चलना चाह रहे।
जय, जय, भारत माँ हे॥

स्वाधीन देश के हम बालक,
स्वाधीन रहे यह ध्यान रहे।
मर्दन कर दें माँ के रिपु का,
केवल इतना अरमान रहे।
जय, जय, भारत माँ हे॥
जय, जय भारत तेरी जय, जय,
जय, जय, भारत माँ हे॥

-दिघवारा,
2.11.1954 ई.

 

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