तनवीर अंजुम की रचनाएँ

तन्हाई के फ़न में कामयाब

अपनी अज़ली आरज़ू के मुताबिक़
मैं बिल्कुल आज़ाद हो चुकी हूँ
हर ख़्वाहिश से
लालच से
ख़ौफ़ से
ग़म से
नफ़रत से
मैं चाहूँ तो रॉकिंग चेयर पर
सुब्ह से शाम कर सकती हूँ
या रात भर सफ़ेद कपड़े पर
रंग-बिरंग फूल काढ़ सकती हूँ
या जंगल में इतनी दूर जा सकती हूँ
कि वापस न आ सकूँ
या दाएरे में घूमते हुए
अपने आप को थका कर गिरा सकती हूँ
कभी न उठने के लिए

और ऐसे में
उन्होंने उसे भेज दिया है
जानबूझ कर
मेरी तन्हाई में ख़लल डालने के लिए
ताकि मिल जाए मुझे फिर कोई
नफ़रत करने के लिए

छोटी सी तो है वो
मगर नहीं डालने देती मुझे
अपनी तन्हाई में ख़लल
मुकम्मल तौर पर आज़ाद
मेरी नफ़रत से भी
मेरी असली वारिस
मगर मुझ से कहीं ज़ियादा कामयाब
तन्हाई के फ़न में

छोटी सी खिड़की है

छोटी सी दीवार की
छोटी सी खिड़की है
क्या देखना पसंद करोगे
नीचे कीचड है, ऊपर सितारे
कीचड़ को तो हाथ बढ़ा कर छू भी सकते हो
सितारों से क़िस्मत का हाल पूछ देखो
वो झोंपड़ी जिस के लिए
तुम ख़तरनाक हद तक
अपने जिस्म को मोड़ रहे हो
दूसरी दीवार के पीछे है
नज़र नहीं आएगी

मैं रख देती हूँ तुम्हारा नाम फ़ोटोग्राफर

लोग समझते हैं
तुम्हारा एक ही नाम है
मगर मैं जानती हूँ ऐसा नहीं है
मैं तो रख लेती हूँ हर रोज़
तुम्हारा एक नया नाम

लो आज मैं रख देती हूँ तुम्हारा नाम
फ़ोटोग्राफ़र

तो अपने नाम के मुताबिक़
तुम उतारो तस्वीरों में
अपनी आँखें, नाक, रूख़्सार और होंट
और ईमेल करते रहो मुझे
ताकि मैं उतारती रहूँ
तुम पर से नज़र-बंद

और दिखाओ अपनी मुस्कुराहट, हँसी और क़हक़हे
ताकि मैं दिखा सकूँ सब को
तुम्हारी ख़ुशी

और दिखाओ अपने आँसू
ताकि मैं उन्हें तस्वीर ही से पोंछ दूँ
और कोई दूसरा न देखे

अपने नाम के मुताबिक
बनाओ उन सब की तस्वीरें
जिन से तुम्हें मोहब्बत है
ताकि मैं गिनती रहूँ उन्हें
और रखूँ नज़र
उन की बढ़ती या घटती हुई तादाद पर
और ग़ौर करती रहूँ
उन के ख़द-ओ-ख़ाल से ज़ाहिर
उन के किरदार पर

और चूँकि तुम नहीं उतार सकते

बहुत दूर से
मेरी तस्वीर
माँग लो मुझ से मेरी एक तस्वीर ईमेल से
और अपनी महारत से
उसे ऊपर से जोड़ दो
किसी ऐसी तस्वीर में
जो थोड़ी सी ख़ाली हो

सुनाओ मुझे भी एक लतीफ़ा

चुप क्यूँ हो जाते हो मुझे देख कर
सुनाओ मुझे भी
एक लतीफ़ा
मेरी सिंफ़ के बारे में

मेरी सिंफ़ के बारे में
तुम्हारी लतीफ़ों की ज़म्बील
उम्र ओ अय्यार की ज़म्बील जैसी है
निकालो कोई नया या सदियों पुराना लतीफ़ा
महफ़ूज़ करो मुझे
जैसे तुम करते हो एक दूसरे को
मेडिकल कॉलेज में मुर्दा जिस्मों की चीर फाड़ करते हुए
स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार करते हुए
या ख़ातून सियासतदानों के बालों के अंदाज़ का तजज़िया करते हुए

चुप क्यूँ हो जाते हुए मुझे देख कर
सुनाओ मुझे भी
एक लतीफ़ा
ताकि मैं हँसूँ
और तरक़्क़ी कर सकूँ तुम्हारी दुनिया में
फिर बना सकूँ
तुम्हारे बारे में
लतीफ़ों की ज़म्बील
उम्र ओ अय्यार की ज़म्बील की तरह
और सुनाया करूँ उन्हें
सिर्फ़ अपनी सिंफ़ के गिरोहों में
और चुप हो जाया करूँ
जब ग़लती से तुम दाख़िल हो जाओ
मेडिकल कॉलेज में
स्टॉक एक्सचेंज में
हमारी पार्लेमान में

मैं अपनी नज़्में वापस लेने को तय्यार हूँ

मेरी नज़्मों ने
कुछ लोगों से लापरवाई बरती है
मेरी नज़्मों ने
कुछ लोगों को अज़िय्यत पहुँचाई है
मेरी नज़्मों ने
कुछ लोगों को मार डाला है

मैं अपनी सारी नज़्में वापस लेने को तय्यार हूँ
मुझे सब लोगों से मुआफ़ी चाहिए

ताकि मैं बर्दाश्‍त कर सकूँ
दुनिया की लापरवाई
अज़िय्यत से तड़पता हुआ दिल
और अपनी मौत

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