भरत तिवारी की रचनाएँ

सारे रंगों वाली लड़की-1

सारे रंगों वाली लड़की
कहाँ हो?

आम के पेड़ में अभी–अभी जागी कोयल
धानी से रंग के बौर
सब दिख रहे हैं
उन आँखों को
जो तुम्हें देखने के लिए ही बनीं

सारे रंगों वाली लड़की
कहाँ हो

तुम्हारी सासों का चलना
मेरी साँसों का चलना है
और अब मेरी सांसें दूभर हो रही हैं
गए दिनों के प्रेमपत्र पढ़ता हूँ
जो बाद में आया वह पहले
सूख रही बेल का दीवार से उघड़ना
सिरे से देखते हुए जड़ तक पहुँचा मैं
पहले प्रेमपत्र को थामे देख रहा हूँ, पढ़ रहा हूँ
देख रहा हूँ पहले प्रेमपत्र में दिखते प्यार को
और वहीं दिख रहा है नीचे से झाँकता सबसे बाद वाला पत्र
और दूर होता प्रेम

वहाँ हो
यहाँ हो
सारे रंगों वाली लड़की
कहाँ हो?

सारे रंगों वाली लड़की-2

सारे रंगों वाली लड़की
कहाँ हो ?

फिर आई
बिना–बताए–आने–वाली–दोपहर
बढ़ाती, दूरी से उपजती पीड़ा
अहाते में सूखता-सा मनीप्लांट
जैसे मर ही जाएगा
जो तुम बनाती हो
उसकी बेल आम के पेड़ पर चिपकी है
पता नहीं क्यों नहीं मरा?

नियति
और कैसे पेड़ के तने को छू गया
पत्तों का विस्तार
देखते–देखते हथेलियों से बड़ा हो गया
वेदना जब लगा कि जाएगी
स्मृतियों को खंगाल
जड़ से लगी यादें बाहर आने लगी
दर्द पुराना साथी
सहारा देता है फिर क्या धूप क्या अमावस ?

दूर गए प्रेम की खोज
मिल ही जाता है स्मृति का कोई तना
ब्रह्माण्ड की हथेली से बड़ा रुदन?
कैसे मरे ये वेदना?

सारे रंगों वाली लड़की
कहाँ हो ?

सारे रंगों वाली लड़की
वृक्षों में भी हो ना ।

सारे रंगों वाली लड़की-3

सारे रंगों वाली लड़की
कहाँ हो?

वहाँ हो
यहाँ हो
मेरी तरह
हमारे बादलों को भी
बिना बताए ही चली गई
जो तुम गई तो खूब बरसे
जो उसके बाद नहीं ही बरसे

बड़े भालू बादल ने बताया था
जब मैं तुम्हें प्यार कर रहा होता हूँ
बादल बूँदें इक्ट्ठी कर रहा होता है
हमारी गर्मी से
बरस जाता है
तपती सड़क पर

पानी का भ्रम होता है
इन्द्रधनुष नहीं –––
सारे रंगों वाली लड़की
कहाँ हो?
इंद्रधनुष के किसी छोर पर
पानी बरसे
तब धूल छँटे ।

सारे रंगों वाली लड़की-4

सारे रंगों वाली लड़की
कहाँ हो?

ज्वार चढ़ी लहरें
सीने में
नहीं उतरती अब नीचे
नहीं सूखती
भीगी पलकें
रुकें ना कम्पन बदन का
रह गई किनारे पर जो लहरें
वही हूँ मैं

सारे रंगों वाली लड़की
कहाँ हो?

सूरज उतरा आँख में
डूबता जाता हूँ उसमें
आ रहा है अन्धेरा
लहरों के निशान
सूख निरा रेत होते

सारे रंगों वाली लड़की
कहाँ हो?

समन्दर हो, जलपरी हो
मेरी हो
ले जाओ मुझे
जलपरी।

सारे रंगों वाली लड़की-5

सारे रंगों वाली लड़की
कहाँ हो?

तुम्हें याद है
कब मिले हम
कि हम अलग नहीं हो सकते
तुम्हें याद है

मौसम गर्मी, उमस का
सुहाना लगता है सिर्फ़
सारे रंगों वाली लड़की

 

 

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