Poetry

भरत व्यास की रचनाएँ

आधा है चंद्रमा, रात आधी

आधा है चंद्रमा रात आधी
रह न जाए तेरी मेरी बात आधी, मुलाक़ात आधी
आधा है चंद्रमा…

आस कब तक रहेगी अधूरी
प्यास होगी नहीं क्या ये पूरी
प्यासा-प्यासा गगन प्यासा-प्यासा चमन
प्यासे तारों की भी है बारात आधी
आधा है चंद्रमा…

सुर आधा है श्याम ने बाँधा
रहा राधा का प्यार भी आधा
नैन आधे खिले होंठ आधे मिले
रही पल में मिलन की वो बात आधी
आधा है चंद्रमा…

पिया आधी है प्यार की भाषा
आधी रहने दो मन की अभिलाषा
आधे छलके नयन आधे छलके नयन
आधी पलकों की भी है बरसात आधी
आधा है चंद्रमा…

ऐ मालिक तेरे बंदे हम

ऐ मालिक तेरे बंदे हम
ऐसे हो हमारे करम
नेकी पर चलें
और बदी से टलें
ताकि हंसते हुये निकले दम

जब ज़ुलमों का हो सामना
तब तू ही हमें थामना
वो बुराई करें
हम भलाई भरें
नहीं बदले की हो कामना
बढ़ उठे प्यार का हर कदम
और मिटे बैर का ये भरम
नेकी पर चलें

ये अंधेरा घना छा रहा
तेरा इनसान घबरा रहा
हो रहा बेखबर
कुछ न आता नज़र
सुख का सूरज छिपा जा रहा
है तेरी रोशनी में वो दम
जो अमावस को कर दे पूनम
नेकी पर चलें

बड़ा कमज़ोर है आदमी
अभी लाखों हैं इसमें कमीं
पर तू जो खड़ा
है दयालू बड़ा
तेरी कृपा से धरती थमी
दिया तूने हमें जब जनम
तू ही झेलेगा हम सबके ग़म
नेकी पर चलें

ज्योत से ज्योत जगाते चलो

ज्योत से ज्योत जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आए जो दीन दुखी, सबको गले से लगाते चलो

जिसका न कोई संगी साथी ईश्वर है रखवाला
जो निर्धन है जो निर्बल है वह है प्रभू का प्यारा
प्यार के मोती लुटाते चलो, प्रेम की गंगा…

आशा टूटी ममता रूठी छूट गया है किनारा
बंद करो मत द्वार दया का दे दो कुछ तो सहारा
दीप दया का जलाते चलो, प्रेम की गंगा…

छाई है छाओं और अंधेरा भटक गई हैं दिशाएं
मानव बन बैठा है दानव किसको व्यथा सुनाएं
धरती को स्वर्ग बनाते चलो, प्रेम की गंगा…

ज्योत से ज्योत जगाते चलो प्रेम की गंगा बहाते चलो
राह में आए जो दीन दुखी सब को गले से लगाते चलो
प्रेम की गंगा बहाते चलो …

कौन है ऊँचा कौन है नीचा सब में वो ही समाया
भेद भाव के झूठे भरम में ये मानव भरमाया
धर्म ध्वजा फहराते चलो, प्रेम की गंगा …

सारे जग के कण कण में है दिव्य अमर इक आत्मा
एक ब्रह्म है एक सत्य है एक ही है परमात्मा
प्राणों से प्राण मिलाते चलो, प्रेम की गंगा …

आ लौट के आजा मेरे मीत

आ लौट के आजा मेरे मीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं
मेरा सूना पड़ा रे संगीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं

बरसे गगन मेरे बरसे नयन देखो तरसे है मन अब तो आजा
शीतल पवन ये लगाए अगन
ओ सजन अब तो मुखड़ा दिखा जा
तूने भली रे निभाई प्रीत
तूने भली रे निभाई प्रीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं
आ लौट…

एक पल है हँसना एक पल है रोना कैसा है जीवन का खेला
एक पल है मिलना एक पल बिछड़ना
दुनिया है दो दिन का मेला
ये घड़ी न जाए बीत
ये घड़ी न जाए बीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं
आ लौट…

जरा सामने तो आओ छलिए

ज़रा सामने तो आओ छलिये
छुप छुप छलने में क्या राज़ है
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है
ज़रा सामने …

हम तुम्हें चाहे तुम नहीं चाहो
ऐसा कभी नहीं हो सकता
पिता अपने बालक से बिछुड़ से
सुख से कभी नहीं सो सकता
हमें डरने की जग में क्या बात है
जब हाथ में तिहारे मेरी लाज है
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है
ज़रा सामने …

प्रेम की है ये आग सजन जो
इधर उठे और उधर लगे
प्यार का है ये क़रार जिया अब
इधर सजे और उधर सजे
तेरी प्रीत पे बड़ा हमें नाज़ है
मेरे सर का तू ही सरताज है
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है
ज़रा सामने …

दिल का खिलौना हाय टूट गया

टूट गया
टूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया
हाय कोई लुटेरा आ के लूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया

हुआ क्या क़ुसूर ऐसा सैंयाँ हमारा
हुआ क्या क़ुसूर ऐसा सैंयाँ हमारा
जाते हुये जो तूने हमें ना पुकारा
जाते हुये जो तूने हमें ना पुकारा
उल्फ़त का तार तोड़ा
हमें मझधार छोड़ा
हम तो चले थे ले के तेरा ही सहारा
साथी हमारा हमसे छूट गया

दिल का खिलौना हाय टूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया
हाय कोई लुटेरा आ के लूट गया
हाय दिल का खिलौना हाय टूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया

कैसी परदेसी तूने प्रीत लगाई
कैसी परदेसी तूने प्रीत लगाई
चैन भी खोया हमने नींद गँवाई
कैसी परदेसी तूने प्रीत लगाई
तेरा ऐतबार कर के
हाय इंतज़ार कर के
ख़ुशियों के बदले ग़म की दुनिया बसाई
ज़ालिम ज़माना हमसे रूठ गया

दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया
हाय कोई लुटेरा आ के लूट गया
हाय दिल का खिलौना हाय टूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया

तेरी शहनाई बोले

तेरी शहनाई बोले
सुन के दिल मेरा डोले
जुल्मी काहे को सुनाए ऐसी तान रे

बादल घिर घिर आए
पापी पपीहरा गाए
कैसे बस में रहे मेरी जान रे

बैरी बन के ये दुनिया खड़ी है
बैरी बन के ये दुनिया खड़ी है
मेरे पाँवों में बेड़ी पड़ी है

किन घड़ियों में अँखियाँ लड़ी हैं
बारों महीने सावन की झड़ी है
इक पल मुखड़ा दिखा जा
दिल का दुखड़ा मिटा जा
तुझ बिन सूना सूना मेरा है जहान रे

तेरी शहनाई बोले
सुन के दिल मेरा डोले
जुल्मी काहे को सुनाए ऐसी तान रे

आजा कब से मैं तुझको बुलाऊँ
आजा कब से मैं तुझको बुलाऊँ
तेरे प्यार के सपने सजाऊँ

जिया चाहे के उड़ के मैं आऊँ
पिया पंख कहाँ से मैं लाऊँ
मैं यहाँ तू वहाँ
बीच में है जहाँ
कैसे पूरे होँ अब अर्मान रे

बादल घिर घिर आए
पापी पपीहरा गाए
कैसे बस में रहे मेरी जान रे

तेरी शहनाई बोले
सुन के दिल मेरा डोले
जुल्मी काहे को सुनाए ऐसी तान रे

जीवन में पिया तेरा साथ रहे

जीवन में पिया तेरा साथ रहे
हाथों में तेरे मेरा हाथ रहे
जीवन में पिया तेरा साथ रहे

जब तक सूरज चन्दा चमके
गंगा जमुना में बहे पानी
रहे तब तक प्रीत अमर अपनी
है ये जनम जनम की दीवानी
ओ रानी याद मिलन
ओ जी हो ओ ओ ओ
ओ रानी याद मिलन की ये रात रहे
हाथों में तेरे मेरा हाथ रहे …

शृंगार भरा पिया प्यार तेरा
झंकार करे है मेरे कँगना में
लगी जब से लगन मेरे मन में सजन
शहनाई बजे है मेरे अँगना में
ओ पिया याद मिलन
ओ जी हो ओ ओ ओ
ओ पिया याद मिलन की ये रात रहे
हाथों में तेरे मेरा हाथ रहे …

बड़े प्यार से मिलना सबसे दुनिया में इंसान रे

बड़े प्यार से मिलना सबसे
बड़े प्यार से मिलना सबसे
दुनिया में इनसान रे
क्या जाने किस भेस में बाबा मिल जाए भगवान रे

कौन बड़ा है कौन है छोटा
कौन बड़ा है कौन है छोटा
ऊँचा कौन और नीचा
प्रेम के जल से सभी को सीचा यह है प्रभू का बग़ीचा
प्रेम के जल से सभी को सीचा यह है प्रभू का बग़ीचा
मत खींचों तुम दीवारें
मत खींचों तुम दीवारें
इनसानों के दरमियान रे
क्या जाने किस भेस में …

ओ महंत जी
ओ महंत जी
तुम महंत जी खोज रहे उन्हें मोती की लड़ियों में
प्रभू को मोती की लड़ियों में
कभी उन्हें ढूँढा क्या ग़रीबों की अँतड़ियों में
कभी उन्हें ढूँढा क्या ग़रीबों की अँतड़ियों में
दीन जनों के अँसुवन में
दीन जनों के अँसुवन में
क्या कभी किया है स्नान रे
क्या जाने किस भेस में …

क्या जाने कब श्याम मुरारी आ जावे बन कर के भिखारी
क्या जाने कब श्याम मुरारी आ जावे बन कर के भिखारी
लौट न जाए कभी द्वार से
लौट न जाए कभी द्वार से
बिना लिए कुछ दान रे
क्या जाने किस भेस में …

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