रामदेव भावुक की रचनाएँ

 

जवानी पैंचा नै लेबै

लिखलाका मेटाय देवै, अपना लिलार के
ठूठ पाखड़ के किरिया, पकबा इनार के

बरगबिहीन मजुरबा के राज हो
बनैबै शोषण से मुक्त समाज हो

जवानी पैंचा नै लेबै, जिनगी उधार के

अब ने मलिकबा के दागबै सलाम हो
जोर-जुलुम के मुँह में लगैबै लगाम हो

चलतै ने हिटलरशाही, जोर कुछ जार के

जलैबै संघर्ष से संघर्ष के मशाल हो
समाजवाद लैबै हम मिटैबै पूँजीवाद हो

राति हम खुशी के लैबै, दिनमा बहार के

घरबा मे कहि देलिऐ मुनमा के माय के
मुनियां के दिनमां अबकी रखिहॅ गुनाय के

ब्याह रचाय देबै सपना कुमार के

शितलहरी

छम-छम धूप नाचै छै छत पर
छौ आपन अंगना छहरी मे
अपहरण भेलौ सुरजा के मैयो
मरि जेबें शितलहरी मे

जेकरा आगू छठ मे मेवा, सूप से मैयो परसै छें
ओकरे आगू भरल पूस में, धूप ले मैयो तरसै छें

एक तेॅ देह पर बस्तर नै छौ
दोसर बैठल छॅ बहरी में

जै चन्दा के चौरचन्दा में, पान-फूल से नापै छें
भरल पूर्णमासी मे ओकरे, सोझा थर-थर काँपै छें

नागपंचमी दिन नागिन के
पिलबै छें दूध बिषहरी मे

उखारि के फेक देलकौ तुलसी के, तुलसीचौरा कानै छौ
हँसि रहल छौ मुरती तोहर, जालिम जार के जानै छौ

जाड़ चार कम्मल के कटतौ
केना के एक मुसहरी मे

तोहर दिल के टुकड़ा मैयो, टुकड़ा-टुकड़ा में बिखरल छौ
एक चद्दर तर केना के अँटतौ, कुल के मन मे अखरल छौ

ई घ’र तेॅ बुरबे करतौ
हे गे माय दसहरी मे

लाल चुनरी लहरैबे करतौ, पुरबैया लगै छै बाम होतौ
पछिया तेॅ पछतैबे करतौ, दुनिया में बदनाम होतौ

ऐ कुहेस के मुरछा लगतौ
मैयो भरल कचहरी मे

पण्डित-पतरा

झूठ लीखल सब पण्डित के पतरा मे छै।
साँच लीखल सुहागिन के अँचरा मे छै।

स्नेह स्वाती बरसयतै नयन के गगन,
प्यासल मन के पपीहा असरा मे छै।

बिना घास के धेनु गाय न्याय के,
रोज दूहै छै ऊ हिम्मत जेकरा मे छै।

जेकर सत्ता के सीमा नै दुनिया मे छै,
सबके सीमा ओकरे खाता-खेसरा मे छै।

पीड़ पिलकै जे भावुक छै ओकरे पता,
जलन केत

हंस के जीभ तरासल छै (कविता)

सहकि गेलौ सरकार सिपाही, उड़ल कबूतर बाज भेलौ
बलात्कार करै छौ बरदी, राइफल तोर रंगबाज भेलौ

देखबै छौ तारा दिन में ई
उल्लू के सुरुज सुझावै छौ
हमरा तॅ कौआ सए ओक्कर
बच्चे तेज बुझाबै छौ

चील शान्ति-सन्देश के वाहक, गिद्ध सिद्ध महराज भेलौ

भुक्खल कुहकि रहल छै कोइली
पपिहा कण्ठ पियासल छै
पानी दूध अलग करतौ के
हंस के जीभ तरासल छै

मोर आँखि के लोर कहै छौ, उजरा टोपी ताज भेलौ

चातक चकोर पंछी परबासी
बेचारा सुरखाव भेल छै
बुलबुल बन्हुआ मजूर बाग के
सारस नया नवाव भेल छै

चमगादर शूली पर चढ़लौ’, नीलकण्ठ मोहताज भेलौ

बेरहम हरम के मुट्ठी मे
बत्तख मुर्गी के जिनगी छै
बोलय बाग के हरिहर ई
भावुक मन में चिनगी छै

प्यादा के सिर पर छै सेहरा, बादशाह बेताज भेलौ

ना जीवन के जतरा मे छै।

जेकरा मेहनत पर

दाबि के रखलेॅ जे तरबा तर, जिनगी भरि मन बहलाबै ले’
बाबूसाहेब केना कहै छ’, अब ऊ तरबा सहलाबै ले’

सुद्धा के मुँह खूब चटलक’, कल तलक जे कुत्ता तोहर
ऊ कुत्ता के केना कहै छ’, तों हमरा नहलाबै ले’

फाड़लक पीठ पत्नी के, फोड़लक हम्मर सिर तोहर जे लाठी
ऊ लाठी मे केना कहै छ’, हमरा तेल लगाबै ले’

हम्मर फूस के घ’र जराय के, रहि रहलै जे बहुमंजिला में
ऊ मंजिल मे केना कहै छॅ हमरा दिया जराबै ले’

दसो निशान छै हमरा अंगुरी के, बाबूसाहेब! जै रोटी पर
ऊ रोटी पर केना कहै छॅ भुक्खल लोर बहाबै ले’

सिंघ पकड़ि के जे बरदा के, अपने हाथ मरखाह बनैले’
ऊ बरदा के केना कहै छॅ मालिक नाथ पिन्हाबै ले’

थाना कोट कचहरी अफसर, जे सरकार निकम्मी भेलै
ऊ सरकार हमरा नै चाही, ऐसन नाच नचाबै ले’

हमरा मेहनत के रोटी, हमरा चाही भरि देह कपड़ा
इन्साफ कहै छै फूसो के घ’र चाही सिर छुपाबै ले

मिललै नै हक माँगै सें, बाबूसाहेब जग जानै छै
लड़ि के हक लबे, नै जैबै मांग कहीं मनबाबै ले

जेकरा मेहनत पर जग जिन्दा छै, ऊ ताकत के अंदाज लगाब’
चूर-चूर होय जैतै, ऐतै जे ताकत अजमाबै ले’

 

 

सुरजा के ठोर

लाल परचम छै पुरबा के हाथ मे, सुरजा के लाल ठोर भए गेलै
एक लोटा पानी दे लाठी अब, उठ रे भरथा भोर भए गेलै

बुतेलकौ अपना घ’र के डिबिया
हवा एतना बेशर्म भए गेल’
बाबूसाहेब के बिजली रात भर
जलते-जलते बेदम भए गेल’

पता नै, की छै सतभैया के मोन मे, किए धुरबा के छाती कठोर भए गेलै

अब उठें बेटा, चल मेहनत के खेत मे
आस के हरियर चास लागल छौ
भुखमरी बेकारी बेटा ई
मंहगाई आकाश भागल छौ

चरि जैतौ खेत शंकर के बसहा, युधिष्ठिर के कुत्ता चोर भए गेलै

हमरा आँखि के सामने बिलटा
बिलटि के बटमार भए गेल’
झूठ डकैती केश मे फँसाबै के कारण
डोमना डकैत के सरदार भए गेल’

आय लोग कहै छै, बिलटा के बहीन, डोमना के बौह मुँहजोर भए गेलै

खंतरबा के जबान बेटी पर लखपतिया
एक दिन नयका दसटकिया फेकने रहै
इहे लेल खंतरबा ओकर खून करि देलकै
किए कि ऊ अपना आँख से ई सब देखने रहै

खंतरबा बेटी के बात कोय नै जानै छै; खंतरबा के नाम सगरो शोर भए गेलै

जराय के फूस के घ’र बारह बजे दिन मे
बिजला के डीह पर हर चलाय देलकै
के नै जानै छै बी.ए. पास बिजला के
गाँव से भगाय के लोग क्रिमिनल बनाय देलकै

के करतै

देश मजूर किसान पर छै

मैयो के मोन मरल मोरी पर, बाबू के जरल धान पर छै
घर भरि छै चिन्ता मे डूबल, भैया के मोन मचान पर छै

हाथ भेलै खाली बाबू के
घर के पूँजी-पगहा गेल
खेती के चलते सेतो मे
करजा-पैंचा सगहा भेल

गहुम पिसबै लेॅ बाबू जाइ छै, भैया पान दोकान पर छै

जेठ मे धेनु गाय बिसुखलै
सावन मे भैंस एकौर भेलै
ठढ़की जरसी बछिया करकी
भरलॅ भादो बउर गेलै

एगो बैल तीन गो कररु, असकर बाबू के जान पर छै

बोरिंग बांझ भेलै नहर के
मांग के सिन्दुर सून भेलै
नदी गवाही छै तलाब के
सामने खेत के खून भेलै

बाबू के वस एक भरोसा, हिम्मत के भगवान पर छै

बाबू के जिनगी मे ऐसन
बहुते बाढ़-सुखार भेलै
हिम्मत नै हारलखिन कहियो
मौसम के भले बुखार भेलै

बाबूजी जानै छै आपन देश, मजूर-किसान पर छै

बिजला के इन्साफ, जब प्रशासने घुसखोर भए गेलै

ललकी पटोर

लाली-लाली फुलवा सिमरवा के फूलल
लागै जैसन सुगना के ठोर हो
ललकी किरिनियाँ मे लागै दुल्हिनियाँ के
सूखै छै ललकी पटोर हो

कमल गुलाब ओढुलबा सें कहलौं
बेली चमेली के फुलवा सें कहलौं
नाचै लेॅ राजा मयुरबा सें कहलौं
रितुपति घर आयल मोर हो

झड़ल फूल तीसी, सरसो गदरायल
गेहूँ के बाली मे लाली छुपायल
घायल के गति जानै न घायल
दिल भेलै मटर के कठोर हो

जै पर गुस्सा जौ चुपके उतारै
झूमै गेहूं, बूँट छुपि केॅ पुकारै
धनियां न आपन सुरतिया उघारै
पछिया करै बड़जोर हो

पूछै अमुआ फूल केना फुलायब
बोल कोइलिया पी केना बुलायब
पी परदेशी जी केना दुखायब
निरमोही भयल चितचोर हो

केना कए बिसरब मोहनी मुरतिया
रहि रहि जरबय चाँदनी रतिया
कल ने पड़ै भेल व्याकुल मतिया
मदना करै अतिजोर हो

रितुपति आयल, शीतल भेल छाती
पपिहा के जेना मिलल जल स्वाती
मनमा फुलल जेना नदी बरसाती
प्रेम के उठल हिलकोर हो

 

हड़ताल

एगो हाथ माथ पर मैयो, दोसर हाथ गाल पर छौ
हमरा तऽ लागै छौ लच्छन, बाबू फेर हड़ताल पर छौ

हक-हिस्सा मांगै के चलते, सरकार से सीधे टक्कर भेल
हड़ताले के कारण मैयो, बाबू हम्मर फक्कर भेल

ऐ देाक जनता के जिनगी, हरदम कट्टल डाल पर छौ

लड़ते-लड़ते ड़ै के सब टा ढं़गो बाबू सीख गेलौ
माँगै से नै भीख मिलै छै, हक पर मरै लेॅ सीख गेलौ

ई नाव तॅ बुड़बे करतौ, अन्हड़ मे जे पाल पर छौ

ओकरा काबू मे बाबू नै छै, छै ओ बाबू के काबू मे
पासा पलटि देतै पल भर मे, छै ऐसन ताकत बाबू मे

चक्का अगला पंचर दूनू, पिछला दूनू टाल पर छौ

 

 

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