रूही कंजाही की रचनाएँ

हसीं चेहरों से सूरत-आश्नाई होती रहती है

हसीं चेहरों से सूरत-आश्नाई[1] होती रहती है
समझ लो इब्तिदाई[2] कारवाई होती रहती है

हमारी बीवी और महँगाई दोनों हैं सगी बहनें
हमारी जेब की अक्सर सफ़ाई होती रहती है

कहा मैं ने कि मिलते हो बिछड़ जाने की नीयत से
कहाँ उसे ने मोहब्बत में जुदाई होती रहती है

कहाँ मैं ने मिरी दर-ख़्वास्तों[3] का क्या बना आख़िर
कहा उस ने कि उन पर कारवाई होती रहती है

कहा लड़के की अम्मी ने रहेगी ख़ुश सदा बेटी
कि ऊपर से भी लड़के की कमाई होती रहती है

तिरे पंद-ओ-नसाएह[4] का नतीजा सिफ़्र[5] है नासेह[6]
बुराई होती रहती थी बुराई होती रहती है

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