संतोष कुँअर की रचनाएँ

बंदर मामा

बंदर मामा बी.ए. पास,
दुलहिन लाए एम.ए. पास
मामा बोले-‘घूँघट कर’,
मामी बोली-‘मुझसे डर’।
मैं लड़की हूँ एम.ए. पास,
मैंने खोदी नहीं है घास।
फिल्म देखने जाऊँगी,
आकर गीत सुनाऊँगी।
रोटी नहीं बनाऊँगी,
जा होटल में खाऊँगी।
बंदर बोला-‘क्यों-क्यों-क्यों’,
बंदरी बोली-‘खों-खों-खों।’

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