जयप्रकाश भारती

जयप्रकाश भारती की रचनाएँ

राकेट उड़ा

राकेट उड़ा हवा में एक,
लाखों लोग रहे थे देख।

पहले खूब लगे चक्कर,
हुआ अचानक छू-मंतर।

जा पहुँचा चंदा के पास,
जहाँ न पानी, जहाँ न घास।

उलटे पाँव लौट आया,
साथ धूल-मिट्टी लाया!

राजा-रानी

एक था राजा
एक थी रानी,
दोनों करते-
थे मनमानी।

राजा का तो
पेट बड़ा था,
रानी का भी-
पेट घड़ा था!

खूब थे खाते
वे छक-छककर,
फिर सो जाते
थे थक-थक कर!

काम यही था
बक-बक, बक-बक,
नौकर से बस
झक-झक, झक-झक!

पगलो मौसी

पगलो मौसी सोती है,
सोते-सोते जगती है।

जगते-जगते सोती है,
पगलो मौसी रोती है।

रोते-रोते हँसती है,
हँसते-हँसते रोती है

पगलो मौसी मोटी है,
मोटी है जी, खोटी है।

कद में एकदम छोटी है
मानो फूली रोटी है।

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