ताज

ताज की रचनाएँ

सुनो दिल जानी मेरे दिल की कहानी तुम

सुनो दिल जानी मेरे दिल की कहानी तुम,
दस्त ही बिकानी बदनामी भी सहूँगी मैं।
देव पूजा ठानी हौं निवाज हूँ भुलानी तजे,
कलमा कुरान सारे गुनन गहूँगी मैं॥
श्यामला सलोना सिरताज सिर कुल्ले दिये,
तेरे नेह दाग में निदाग ह्वै दहूँगी मैं।
नन्द के कुमार कुरवान ताणी सूरत पै,
हौं तो तुरकानी हिन्दुआनी ह्वै रहूँगी मैं॥

छैल जो छबीला सब रंग रंगीला बढ़ा

छैल जो छबीला सब रंग रंगीला बढ़ा,
चित्त का अड़ीला सब देवतों से न्यारा है।
काल गले सोहै, नाक मोती सेत सोहै कान,
मोहै मन कुंडल मुकुट सीस धारा है॥
दुष्ट जम मारे, संत जन रखवारे ‘नाज’ ,
चित्त हित वारे प्रेम प्रीतिकर वारा है।
नन्द जू को प्यारा जिन कंस को पछारा,
वह वृन्दावनवारा कृष्ण साहेब हमारा है॥

चैन मन में न मलीन सुनैन परे जल में न तई है

चैन मन में न मलीन सुनैन परे जल में न तई है।
‘ताज’ कहै परयंक यों बाल ज्यों चंपकी माल बिलाय गई हैं॥
नेकु बिहाय न रैन कछू यह जान भयानक भारि भई है।
भौन पैं भानु समान सुदीपक अंगन में मानों आगि दई है॥

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