भावना की रचनाएँ

नारी / हम्मर लेहू तोहर देह

नारी एगो उदाहरण हए
अनेकता में एकता के
कंहु हए उ ममतामयी माई
त कहँु निम्मन मेहरारू
त कहुं प्रेमिका
कंहु लाजवनती से जादा
छुई-मुई
त कंहु भाग से जादा अक्रामक
कंहु त्याग के परिभाषा के
अपना में समेटले
महान व्यक्तित्व
नारी हर रूप के
बखूबी निभबइत
एगो पहेली हए।

नया साल / हम्मर लेहू तोहर देह

रात के बारह बजते
हम ढुक जाएव नया साल में
चारू तरफ
फटाका लागत फूटे
आउर छा जाएत
एगो नया उल्लास
पूरा वातावरन में।
सहरी लोग जहां
पाटी में मसगूल हो जाएत
त कुछे घंटा के बाद
सुरूजो निकल जाएत
अप्पन नया किरीन के साथ
आ चहचहाए लागत चिडईया
नया साल के स्वागत में।
तखनिए कहीं से
मुन्ना काने लागत ला
त गरीब माई
अप्पन सूखल छाती में
टटोले लागत दूध।
भोर होइते जब हम देखली
फेनू से ओनाहिते हए भीड़
रासन के कतार में
समाचार-पत्र में-
चोरी/डाका/बलत्कार बनल हुए
मुख्य खबर
त हमरा बुझाएल कि-
नया साल में
कुछो न हए बदलल
बस एगो कलेन्डर के सिवा।

किसान / हम्मर लेहू तोहर देह

बरसात के अन्हर-झक्कर में
देखली जाइत
एगो किसान के
हर लेले।
एक्को गो सऊंस
कपड़ा-लत्ता न रहे
ओकरा देह पर
आउर न रहे छता
जेकरा से उ बचा सके
अप्पन देह
ई बरसईत पानी में।
तखनिए हम्मर नजर
पड़ गेल ओकरा गोर पर
जे रहे कादो से सनल
तइयो केन्हु-केन्हु से
बेमाय ओनाहिते बुझाइत रहे
मुदा उ किसान के
कुछो फरक न परइत रहे
ई सब बात के।
ऊ चलल जाइत रहे
अप्पन धरती माई के
हरिहर करे के खातिर
अप्पन देस के
आउर समृद्ध करे के खातिर।

इआद / हम्मर लेहू तोहर देह

दूभी के तोर-तोर के
गोर ला बनइली पैजनी
लसफसिया के तोर-तोर के
हाथ ला बनइली पहुंची

भंगरिया के फूल तोर
कान ला बनइली कनफूल
गम्हार के बीया गांथ के
बनइली मटरमाला

मिल-जुल के सखी संगे
खेलली दुलहा-कनिया
घेटा-जोरी क के गइली
गीत बन नचनिया

कइसन सुन्नर रहे जिनगी
कईसन सुन्नर दुनिया
अब त इआद में खाली
सेस रह गेल “भावना”

हर तरफ से हार होए लगइअऽ / हम्मर लेहू तोहर देह

हर तरफ से हार होए लगइअऽ।
त जिनगी पहाड़ होए लगइअऽ॥

मन हुलसे आउर हो हाथ में हुनर।
त सपना सकार होए लगइअऽ॥

सांच जब निकल क बाहर अबइअऽ।
त झूठ लचार होए लगइअऽ॥

एकदमें सूखल-साखल ताल-तलेया!
परइत बरखा धार होए लगइअऽ॥

कइसन उ समय रहे / हम्मर लेहू तोहर देह

कइसन उ समय रहे जे उ हमरा करीब रहे।
माथ के सेनूर रहे आउर हम्मर नसीब रहे॥

मिल गेल दउलत खूबे तइयो पिआसल मन रहल।
पेआर के अभाव में ई दिल बड़ा गरीब रहे॥

चहला से सबके न मिल पबइअऽ खुशी के सनेस।
भरल रहे जेक्कर झोली ऊ सच्चे खुसनसीब रहे॥

आवारा बन घुमइअऽ आइ इहां त काल उहां।
पागल जेकरा सब कहे ऊ पेआर के मरीज रहे॥

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