राजेश्वर ‘गुरु’की रचनाएँ

कौआ मामा

बिल्ली मेरी प्यारी मौसी
कौआ मेरा मामा!
बिल्ली पहने फ्रॉक गरारा,
कौआ जी पाजामा!

काँव-काँव कौआ जी बोलें
म्याऊँ-म्याऊँ बिल्ली।
कौआ जी कलकत्ता जाएँ,
बिल्ली जाए दिल्ली!

कौआ जी रसगुल्ला खाएँ,
बिल्ली खाए हलुआ।
गोरी-गोरी बिल्ली मौसी,
कौआ मामा कलुआ!

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