ज्ञान प्रकाश आकुल की रचनाएँ

ज्ञान प्रकाश आकुल की रचनाएँ

जाओ बादल जाओ बादल, तुम्हें मरुस्थल बुला रहा है। वेणुवनों की वल्लरियाँ अब पुष्पित होना चाह रहीं हैं, थकी स्पृहायें…

2 months ago