हरी चंद अख़्तर की रचनाएँ

हरी चंद अख़्तर की रचनाएँ

जिस ज़मीं पर तिरा नक़्श-ए-कफ़-ए-पा होता है जिस ज़मीं पर तिरा नक़्श-ए-कफ़-ए-पा होता है एक इक ज़र्रा वहाँ क़िबला नुमा…

3 months ago