जयंत परमार

जयंत परमार की रचनाएँ

ग़ालिब जब भी तुझको पढ़ता हूँ लफ़्ज़-लफ़्ज़ से गोया आसमाँ खिला देखूँ एक-एक मिसरे में कायनात का साया फैलता हुआ…

4 months ago