‘शहपर’ रसूल

शहपर’ रसूल की रचनाएँ

बे-इंतिहा होना है तो इस ख़ाक के हो जाओ बे-इंतिहा होना है तो इस ख़ाक के हो जाओ इमकाँ की…

3 months ago