फ़हमीदा रियाज़

फ़हमीदा रियाज़ की रचनाएँ

नया भारत तुम बिल्कुल हम जैसे निकले अब तक कहाँ छिपे थे भाई वो मूरखता, वो घामड़पन जिसमें हमने सदी…

4 months ago