अमीर’ क़ज़लबाश

‘अमीर’ क़ज़लबाश की रचनाएँ

आँखें खुली हुई है तो मंज़र भी आँखें खुली हुई है तो मंज़र भी आएगा काँधों पे तेरे सर है…

3 months ago