गदाधर भट्ट

गदाधर भट्ट की रचनाएँ

सखी, हौं स्याम रंग रँगी  सखी, हौं स्याम रंग रँगी। देखि बिकाइ गई वह मूरति, सूरति माहि पगी॥१॥ संग हुतो…

2 months ago