गिरधर गोपाल

गिरधर गोपाल की रचनाएँ

शरद की हवा शरद की हवा ये रंग लाती है, द्वार-द्वार, कुंज-कुंज गाती है। फूलों की गंध-गंध घाटी में बहक-बहक…

2 months ago